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Sunday, 16 August 2015

माँ

एक बार इस कविता को दिल से पढ़िये
शब्द शब्द में गहराई है...

जब आंख खुली तो अम्‍मा की
गोदी का एक सहारा था
उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको
भूमण्‍डल से प्‍यारा था

उसके चेहरे की झलक देख
चेहरा फूलों सा खिलता था
उसके स्‍तन की एक बूंद से
मुझको जीवन मिलता था

हाथों से बालों को नोंचा
पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस मां ने पुचकारा
हमको जी भर के प्‍यार किया

मैं उसका राजा बेटा था
वो आंख का तारा कहती थी
मैं बनूं बुढापे में उसका
बस एक सहारा कहती थी

उंगली को पकड. चलाया था
पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज
अन्‍तर में सदा सहेजा था

मेरे सारे प्रश्‍नों का वो
फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन
वो खुद गुलाब बन जाती थी

मैं बडा हुआ तो कॉलेज से
इक रोग प्‍यार का ले आया
जिस दिल में मां की मूरत थी
वो रामकली को दे आया

शादी की पति से बाप बना
अपने रिश्‍तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूं
मां की ममता को भूल गया

हम भूल गये उसकी ममता
मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गये अपना जीवन
वो अमृत वाली छाती थी

हम भूल गये वो खुद भूखी
रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्‍तर देकर
खुद गीले में सो जाती थी

हम भूल गये उसने ही
होठों को भाषा सिखलायी थी
मेरी नीदों के लिए रात भर
उसने लोरी गायी थी

हम भूल गये हर गलती पर
उसने डांटा समझाया था
बच जाउं बुरी नजर से
काला टीका सदा लगाया था

हम बडे हुए तो ममता वाले
सारे बन्‍धन तोड. आए
बंगले में कुत्‍ते पाल लिए
मां को वृद्धाश्रम छोड आए

उसके सपनों का महल गिरा कर
कंकर-कंकर बीन लिए
खुदग़र्जी में उसके सुहाग के
आभूषण तक छीन लिए

हम मां को घर के बंटवारे की
अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से
गाली की भाषा तक ले आए

मां की ममता को देख मौत भी
आगे से हट जाती है
गर मां अपमानित होती
धरती की छाती फट जाती है

घर को पूरा जीवन देकर
बेचारी मां क्‍या पाती है
रूखा सूखा खा लेती है
पानी पीकर सो जाती है

जो मां जैसी देवी घर के
मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें
इंसान नहीं बन सकते हैं

मां जिसको भी जल दे दे
वो पौधा संदल बन जाता है
मां के चरणों को छूकर पानी
गंगाजल बन जाता है

मां के आंचल ने युगों-युगों से
भगवानों को पाला है
मां के चरणों में जन्‍नत है
गिरिजाघर और शिवाला है

हिमगिरि जैसी उंचाई है
सागर जैसी गहराई है
दुनियां में जितनी खुशबू है
मां के आंचल से आई है

मां कबिरा की साखी जैसी
मां तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली
खुसरो की अमर रूबाई है

मां आंगन की तुलसी जैसी
पावन बरगद की छाया है
मां वेद ऋचाओं की गरिमा
मां महाकाव्‍य की काया है

मां मानसरोवर ममता का
मां गोमुख की उंचाई है
मां परिवारों का संगम है
मां रिश्‍तों की गहराई है

मां हरी दूब है धरती की
मां केसर वाली क्‍यारी है
मां की उपमा केवल मां है
मां हर घर की फुलवारी है

सातों सुर नर्तन करते जब
कोई मां लोरी गाती है
मां जिस रोटी को छू लेती है
वो प्रसाद बन जाती है

मां हंसती है तो धरती का
ज़र्रा-ज़र्रा मुस्‍काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर
धरती को शीश झुकाता है

माना मेरे घर की दीवारों में
चन्‍दा सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में
बस केवल मां की मूरत है

मां सरस्‍वती लक्ष्‍मी दुर्गा
अनुसूया मरियम सीता है
मां पावनता में रामचरित
मानस है भगवत गीता है

अम्‍मा तेरी हर बात मुझे
वरदान से बढकर लगती है
हे मां तेरी सूरत मुझको
भगवान से बढकर लगती है

सारे तीरथ के पुण्‍य जहां
मैं उन चरणों में लेटा हूं
जिनके कोई सन्‍तान नहीं
मैं उन मांओं का बेटा हूं

हर घर में मां की पूजा हो
ऐसा संकल्‍प उठाता हूं
मैं दुनियां की हर मां के
चरणों में ये शीश झुकाता हूं...

हनुमान चालीसा अर्थ सहित

हनुमान चालीसा अर्थ सहित !!
श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु,जो दायकु फल चारि।
《अर्थ》→ शरीर गुरु महाराज के चरण
कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण
को पवित्र
करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन
करता हूँ,जो चारों फल धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष
को देने वाला हे।★
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बुद्धिहीन तनु जानिके,सुमिरो पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं,हरहु कलेश विकार।★
《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन
करता हूँ। आप तो जानते
ही हैं,कि मेरा शरीर और
बुद्धि निर्बल है।मुझे शारीरिक बल,सदबुद्धि एवं
ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कार
दीजिए।★
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,जय कपीस तिहुँ लोक
उजागर॥1॥★
《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी!
आपकी जय हो।
आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर!
आपकी जय हो!तीनों लोकों,स्वर्ग लोक,भूलोक
और
पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।★
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राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥
2॥★
《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन!आपके समान
दूसरा बलवान नही है।★
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महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार
सुमति के संगी॥3॥

《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली!
आप विशेष पराक्रम
वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है,और
अच्छी बुद्धि वालो के साथी,सहायक है।★
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कंचन बरन बिराज सुबेसा ,कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
4॥★
《अर्थ》→ आप सुनहले रंग,सुन्दर
वस्त्रों,कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से
सुशोभित हैं।★
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हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे,काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
5॥★
《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और
कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।★
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शंकर सुवन केसरी नंदन,तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार!हे केसरी नंदन
आपके
पराक्रम और महान यश की संसार भर मे
वन्दना होती है।★
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विद्यावान गुणी अति चातुर,रान काज करिबे को आतुर॥
7॥★
《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है,गुणवान
और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने
के लिए आतुर रहते है।★
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प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन
बसिया॥8॥★
《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस
लेते है।श्री राम,सीताऔर लखन आपके
हृदय मे बसे
रहते है।★
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सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा,बिकट रुप धरि लंक
जरावा॥9॥★
《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके
सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके
लंका को जलाया।★
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भीम रुप धरि असुर संहारे,रामचन्द्र के काज संवारे॥
10॥★
《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके
राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के
उदेश्यों को सफल कराया।★
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लाय सजीवन लखन
जियाये,श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

《अर्थ 》→ आपने
संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मण
जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर
ने हर्षित होकर
आपको हृदय से लगा लिया।★
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रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई,तुम मम प्रिय
भरत सम भाई॥
12॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने
आपकी बहुत
प्रशंसा कीऔर कहा की तुम मेरे भरत जैसे
प्यारे
भाई हो।★
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सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,अस कहि श्री पति कंठ
लगावैं॥13॥★
《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय
से
लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से
सराहनीय है।★
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सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित
अहीसा॥
14॥★
《अर्थ》→
श्री सनक,श्री सनातन,श्री सनन्दन,श्री सनत्कुमार
आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद
जी,सरस्वती जी,शेषनाग
जी सब आपका गुण गान करते
है।★
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जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,कबि कोबिद कहि सके
कहाँ ते॥15॥★
《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के
रक्षक,कवि विद्वान,पंडित या कोई भी आपके यश
का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।★
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तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,राम मिलाय
राजपद
दीन्हा॥16॥★
《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव
जी को श्रीराम से
मिलाकर उपकार किया ,जिसके कारण वे राजा बने।★
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तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,लंकेस्वर भए सब जग
जाना॥17॥★
《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन
किया जिससे वे लंका के राजा बने,इसको सब संसार
जानता है।★
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जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,लील्यो ताहि मधुर फल
जानू॥18॥★
《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है
की उस पर
पहुँचने के लिए हजार युग लगे।दो हजार योजन
की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक
मीठा फल समझकर
निगल लिया।★
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प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,जलधि लांघि गये अचरज
नाहीं॥19॥★
《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र
जी की अंगूठी मुँह
मे रखकर समुद्र को लांघ
लिया,इसमें कोई आश्चर्य नही है।★
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दुर्गम काज जगत के जेते,सुगम अनुग्रह तुम्हरे
तेते॥20॥★
《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम
हो,वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।★
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राम दुआरे तुम रखवारे,होत न आज्ञा बिनु पैसा रे ॥
21॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार
के आप
रखवाले है,जिसमे
आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश
नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के
बिना राम
कृपा दुर्लभ है।★
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सब सुख लहै तुम्हारी सरना,तुम रक्षक काहू
को डरना ॥22॥★
《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते
है,उस
सभी को आन्नद प्राप्त होता है,और जब आप रक्षक
है,तो फिर किसी का डर नही रहता।★
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आपन तेज सम्हारो आपै,तीनों लोक हाँक ते काँपै॥
23॥★
《अर्थ 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई
नही रोक
सकता,आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते
है।★
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भूत पिशाच निकट नहिं आवै,महावीर जब नाम सुनावै॥
24॥

《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान
जी का नाम
सुनाया जाता है,वहाँ भूत,पिशाच पास
भी नही फटक
सकते।★
••••••••••••••••••••••••••••••
नासै रोग हरै सब पीरा,जपत निरंतर हनुमत
बीरा ॥25॥★
《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी!
आपका निरंतर जप करने से
सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट
जाती है।
•••••••••••••••••••••••••••••••
संकट तें हनुमान छुड़ावै,मन क्रम बचन ध्यान
जो लावै॥26॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे,कर्म
करने
मे और बोलने मे,जिनका ध्यान आपमे रहता है,उनको सब
संकटो से आप छुड़ाते है।★
••••••••••••••••••••••••••••••
सब पर राम तपस्वी राजा,तिनके काज सकल तुम साजा॥
27॥★
《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र
जी सबसे
श्रेष्ठ है,उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर
दिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
और मनोरथ जो कोइ लावै,सोई अमित जीवन फल पावै॥
28॥

《अर्थ 》→ जिसपर आपकी कृपा हो,वह कोई
भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है
जिसकी जीवन मे कोई
सीमा नही होती।★
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चारों जुग परताप तुम्हारा,है परसिद्ध जगत उजियारा॥
29॥★
《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग,त्रेता,द्वापर
तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है,जगत मे
आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।★
••••••••••••••••••••••••••••••
साधु सन्त के तुम रखवारे,असुर निकंदन राम दुलारे॥
30॥★
《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप
सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते
है।★
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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ,अस बर दीन
जानकी माता॥
३१॥★
《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से
ऐसा वरदान
मिला हुआ है,जिससे आप
किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे
सकते
है।★
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई
नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर
जाता है।★
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत
बड़ा बना देता है।★
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे
जितना भारी बना लेता है।★
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन
जाता है।★
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ
की प्राप्ति होती है।★
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे
समा सकता है,आकाश मे उड़ सकता है।★
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय
हो जाता है।★
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
राम रसायन तुम्हरे पासा,सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ
जी की शरण मे
रहते है,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य
रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरे भजन राम को पावै,जनम जनम के दुख बिसरावै॥
33॥★
《अर्थ 》→ आपका भजन करने सेर श्री राम
जी प्राप्त होते है,और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर
होते है।★
••••••••••••••••••••••••••••••
अन्त काल रघुबर पुर जाई,जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥
34॥★
《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ
जी के धाम
को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे
तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
और देवता चित न धरई,हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी!
आपकी सेवा करने से सब
प्रकार के सुख मिलते है,फिर अन्य
किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।

•••••••••••••••••••••••••••••••
संकट कटै मिटै सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत
बलबीरा॥36॥

《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी!
जो आपका सुमिरन
करता रहता है,उसके सब संकट कट जाते है और सब
पीड़ा मिट जाती है।★
••••••••••••••••••••••••••••••
जय जय जय हनुमान गोसाईं,कृपा करहु गुरु देव
की नाई॥37॥★
《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी!
आपकी जय हो,जय
हो,जय हो!आप मुझपर कृपालु श्री गुरु
जी के समान
कृपा कीजिए।★
••••••••••••••••••••••••••••••
जो सत बार पाठ कर कोई,छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥★
《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार
पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे
परमानन्द मिलेगा।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,होय
सिद्धि साखी गौरीसा॥
39॥★
《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान
चालीसा लिखवाया,इसलिए वे
साक्षी है,कि जो इसे
पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त
होगी।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
तुलसीदास सदा हरि चेरा,कीजै नाथ हृदय
मँह डेरा॥40॥

《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी!
तुलसीदास
सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप
उसके हृदय मे
निवास कीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••
पवन तनय संकट हरन,मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित,हृदय बसहु सुरभुप॥★
《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार!आप आनन्द
मंगलो के स्वरुप है।हे देवराज! आप
श्री राम,सीता जी और लक्ष्मण
सहित मेरे हृदय मे
निवास कीजिए।★

गरीब की बेटी


एक दिन की बात है , लड़की की माँ खूब
परेशान होकर अपने पति को बोली की एक
तो हमारा एक समय
का खाना पूरा नहीं होता और बेटी साँप
की तरह बड़ी होती जा रही है .

गरीबी की हालत में इसकी शादी केसे
करेंगे ?

बाप भी विचार में पड़ गया . दोनों ने दिल
पर पत्थर रख कर एक फेसला किया की कल
बेटी को मार कर गाड़ देंगे .

दुसरे दिन का सूरज निकला , माँ ने
लड़की को खूब लाड प्यार किया , अच्छे से
नहलाया , बार - बार उसका सर चूमने लगी .

यह सब देख कर लड़की बोली : माँ मुझे
कही दूर भेज रहे हो क्या ?

वर्ना आज तक आपने
मुझे ऐसे कभी प्यार नहीं किया ,
माँ केवल चुप रही और रोने लगी ,

तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू
लेकर
आया , माँ ने लड़की को सीने से लगाकर
बाप के साथ रवाना कर दिया .
रस्ते में चलते - चलते बाप के पैर में कांटा चुभ
गया , बाप एक दम से निचे बेथ गया ,

बेटी से
देखा नहीं गया उसने तुरंत कांटा निकालकर
फटी चुनरी का एक हिस्सा पैर पर बांध
दिया .

बाप बेटी दोनों एक जंगल में पहुचे बाप ने
फावड़ा लेकर एक गढ़ा खोदने
लगा बेटी सामने बेठे - बेठे देख रही थी ,
थोड़ी देर बाद गर्मी के कारण बाप
को पसीना आने
लगा .

बेटी बाप के पास गयी और
पसीना पोछने के लिए अपनी चुनरी दी .
बाप ने धक्का देकर बोला तू दूर जाकर बेठ।
थोड़ी देर बाद जब बाप गडा खोदते - खोदते
थक गया ,

बेटी दूर से बैठे -बैठे देख रही थी, जब
उसको लगा की पिताजी शायद थक गये
तो पास आकर बोली पिताजी आप थक गये
है .

लाओ फावड़ा में खोद देती हु आप
थोडा आराम कर लो . मुझसे आप
की तकलीफ नहीं देखि जाती .
यह सुनकर बाप ने अपनी बेटी को गले
लगा लिया, उसकी आँखों में आंसू
की नदिया बहने लगी , उसका दिल पसीज
गया ,

बाप बोला : बेटा मुझे माफ़ कर दे , यह
गढ़ा में तेरे लिए ही खोद रहा था . और तू
मेरी चिंता करती है , अब
जो होगा सो होगा तू हमेशा मेरे
कलेजा का टुकड़ा बन कर रहेगी में खूब मेहनत
करूँगा और तेरी शादी धूम धाम से करूँगा -

सारांश : बेटी तो भगवान की अनमोल भेंट
है ,इसलिए कहते हे बेटा भाग्य से मिलता हे और बेटी सौभाग्य से।

History of India

👉महान हस्तियों का जन्म

Jan...

12-1-1863 स्वामी विवेकानंद
28-1-1865 लाला लजपतराय
1-1-1894 जगदीश चंद्र बोंज
23-1-1897 सुभाष चंद्र बोंज
13-1-1949 राकेश शर्मा
20-1-1900 जनरल के.ऍम.    करिअप्पा

Feb...

18-2-1486 महाप्रभु चेतन्य
18-2-1836 रामकुष्ण परमहंस
22-2-1873 मोहम्मद इकबाल
13-2-1879 सरोजिनी नायडु
29-2-1896 मोरारजी देसाइ

March...

23-3-1910 डॉ. राममनोहर लोहिया

April...

15-4-1469 गुरु नानक देवजी
14-4-1563 गुरु अर्जुन देवजी
14-4-1891 डॉ.भीमराव                   आंबेडकर

May...

5-5-1479   गुरु अमरदास
31-5-1539 महाराणा प्रताप
6-5-1861   मोतीलाल नेहरु
7-5-1861   रविन्द्रनाथ टेगोर
9-5-1866   गोपालकृष्ण गोखले
24-5-1907 महादेवी वर्मा
2-5-1921   सत्यजित राय

Jun...

26-6-1838 बंकिमचंद्र चट्टो         पाध्याय

July...

23-7-1856 लोकमान्य तिलक
31-7-1880 प्रेमचंद मुनशी
29-7-1904 जे.आर.टाटा

Aug...

27-8-1910  मधर टेरेसा
29-8-1905  ध्यानचंद

Sept...

26-9-1820 ईश्वरचंद्र           विद्यासागर
4-9-1825  दादाभाई नवरोजी
10-9-1887 गोविंद वल्लभ पंत
5-9-1888  डॉ. राधाकृष्ण
11-9-1895 विनोबा भावे
27-9-1907 भगतसिंह
15-9-1861 ऍम.विश्वसरेइया
15-9-1876 शरदचंद्र चटोपाध्याय

Oct...

1-10-1847 डॉ. ऐनी.बेसन्ट
2-10-1869 महात्मा गांधीजी
22-10-1873 स्वामी रामतीर्थ
31-10-1875 सरदार वल्लभभाई पटेल
31-10-1889 आचार्य नरेन्द्रदवे
11-10-1902 जयप्रकाश नारायण
30-10-1909 डॉ. होमी भाभा
19-10-1920 पांडुरंग शास्त्रीजी
आठवले पु. दादा

Nov:
13-11-1780 महाराणा रणजीतसिंह
4-11-1845 वासुदेव बळवंत फडके
7-11-1858 बिपिनचंद्र पाल
30-11-1858 जगदीशचंद्र बोज
5-11-1870 देशबंधु चितरंजनदास
11-11-1888 मौलाना आज़ाद
4-11-1889 जमनालाल बजाज
19-11-1917 श्रीमती इंदिरागांधी
23-11-1926 श्री सत्यसाई बाबा
4-11-1939 शकुंतलादेवी
12-11-1896 सलीमअली

Dec:
9-12-1484 महाकवि सूरदास
25-12-1861 मदनमोहन मालविया
27-12-1869 ठक्कर बापा
7-12-1879 चक्रवर्ती राजगोपालचारी
3-12-1884 डॉ. राजेन्द्रप्रसाद
30-12-1887 कनैयालालमुनशी
11-12-1931 राजेन्द्रकुमार जेन ओसो रजनीश
22-12-1887 रामानुजम

🌷 भारत के प्रमुख पदाधिकारी

💕 * राष्ट्रपति
🚥 श्री प्रणब मुखर्जी

💕 * उप राष्ट्रपति
🚥 श्री हामिद अंसारी

💕 * प्रधान मंत्री
🚥 श्री नरेंदर मोदी

💕 * लोकसभा अध्यक्ष
🚥 श्रीमती सुमित्रा महाजन

💕 * सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश
🚥 श्री एच एल दत्तू

💕 * राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्री के. जी.बाल क्रष्णन

💕 * राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्रीमती कुमारमंगलम्

💕 * मुख्य चुनाव आयुक्त
🚥 श्री एच एस ब्रम्हा

💕 * अटार्नी जनरल
🚥 श्री मुकुल रोहतगी

💕 * सोलिसिटर जनरल
🚥 श्री रनजीत कुमार

💕 * राष्ट्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्री ए पी शाह

💕 * राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
🚥 श्री अजीत कुमार डोवल

भारत के सभी राज्यों के वर्तमान मुख्यमंत्री

राज्य ---- मुख्यमंत्री
तेलंगाना ----- के चंद्रशेखर राव
आन्ध्र प्रदेश ---- चन्द्रबाबू नायडू
अरुणाचल प्रदेश ---- नबम तुकी
असम ---- तरुण गोगोई
बिहार ........नितिश कुमार
छत्तीसढ ---- रमन सिंह
दिल्ली ------ अरविंद केजरीवाल
गोआ ----- लक्ष्मीकांत परेस्कर
गुजरात ----- आनंदीबेन पटेल
हरियाणा ----- मनोहर लाल खट्टर
हिमाचल प्रदेश ----- वीरभद्र सिंह
जम्मू और कश्मीर ----- मुफ्ती मुहम्मद
झारखण्ड ---- रघुवर दास
कर्नाटक ----- सिद्धारैया
केरल ------ ओमान चांडी
मध्य प्रदेश ------ शिवराज सिंह चौहान
महाराष्ट्र ----- देवेन्द्र फड़नवीस
मणिपुर ----- ओकराम इबोई सिंह
मेघालय ----- मुकुल संगमा
मिज़ोरम पु ----- ललथानवाला
नागालैण्ड ----- टी आर जेलियांग
ओडिशा ----- नवीन पटनायक
पॉण्डिचेरी ---- एन. रंगास्वामी
पंजाब ---- प्रकाश सिंह बादल
राजस्थान ---- वसुंधरा राजे सिंधिया
सिक्किम ---- पवन कुमार चामलिंग
तमिलनाडु ----ओ. पनीरसेल्वम्
त्रिपुरा ------ माणिक सरकार
उत्तराखण्ड ------ हरीश रावत
उत्तर प्रदेश ------ अखिलेश यादव
पश्चिम बंगाल ------ ममता बनर्जी

🔴पंचायती राज🔴

🔴 संविधान के किस भाग में पंचायती राज व्यवस्था का वर्णन है—👉 भाग-9

🔴पंचायती राज व्यवस्था किस पर आधारित है—👉 सत्ता के विकेंद्रीकरण पर

🔴 पंचायती राज का मुख्य उद्देश्य क्या है— 👉जनता को प्रशासन में भागीदारी योग्य बनाना

🔴किसके अंतर्गत पंचायती राज व्यवस्था का वर्णन है— 👉नीति-निर्देशक सिद्धांत

🔴 संविधान के किस संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है— 👉75वें संशोधन

🔴75वें संशोधन में कौन-सी अनुसूची जोड़ी गई हैं— 👉11वीं

🔴पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन हेतु कौन उत्तरदायी है— 👉राज्य निर्वाचन आयोग

🔴 भारत में पंचायती राज अधिनियम कब लागू हुआ— 👉25 अप्रैल, 1993

🔴सर्वप्रथम पंचायती राज व्यवस्था कहाँ लागू की गई— 👉नागौर, राजस्थान में

🔴 राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था कहाँ लागू की गई— 👉1959 को

🔴देश के सामाजिक व सांस्कृतिक उत्स्थान के लिए कौन-सा कार्यक्रम चलाया गया—👉 सामुदायिक विकास कार्यक्रम

🔴 भारत में सामुदायिक विकास कार्यक्रम कब आरंभ हुआ— 👉2 अक्टूबर, 1952

🔴 किसकी सिफारिश पर भारत में पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की गई 👉बलवंत राय मेहता समिति

🔴पंचायती राज की सबसे छोटी इकाई क्या है— 👉ग्राम पंचायत

🔴 बलवंत राय समिति के प्रतिवेदन के अनुसार महत्वपूर्ण संस्था कौन-सी है— 👉पंचायत समिति

🔴 पंचायती राज संस्थाओं के संगठन के दो स्तर होने का सुझाव किसने दिया था— 👉अशोक मेहता समिति

नदियों के किनारों पर बसे विश्व के प्रमुख नगर🌹

🍭 नगर   👉  नदी

🍭 मास्को 👉 मोस्कवा नदी
🍭 कोलम्बो 👉 केलानी नदी
🍭 बगदाद 👉 टिगरिस नदी
🍭नई दिल्ली 👉 य मुनानदी
🍭बेलग्रेड 👉 डेन्यूब नदी
🍭आगरा 👉 यमुनानदी
🍭 बर्लिन 👉 स्ट्री नदी
🍭 हरिद्वार 👉 गंगा नदी
🍭 बुडापेस्ट 👉 डेन्यूब नदी 
🍭 कानपुर 👉 गंगानदी
🍭 काहिरा 👉 नील नदी
🍭 नासिक 👉 गोदावरी नदी
🍭 करांची  👉 सिन्धु नदी
🍭 उज्जैन 👉 क्षिप्रा नदी
🍭 लन्दन 👉  टेम्स नदी
🍭 श्रीनगर 👉 झेलमनदी
🍭 लाहौर 👉 रावी नदी
🍭 इलाहाबाद 👉 गंगा-यमुना
🍭 न्यूयार्क 👉 हडसन नदी
🍭 अहमदाबाद 👉 साबरमती
🍭 पेरिस 👉 सीन नदी 
🍭 कोलकात्ता 👉  हुगली
🍭 रोम 👉 टाईबर नदी
🍭 गुवाहाटी 👉 ब्रह्मपुत्र
🍭 शंघाई 👉 यांगटिसिक्यांग
🍭 जबलपुर 👉 नर्मदा
🍭टोकियो  👉 सुमीदा नदी
🍭 सूरत 👉 ताप्ती
🍭 विएना 👉  डेन्यूब नदी 
🍭 हैदराबाद 👉  मूसी
🍭 वारसा  👉 विस्तुला नदी
🍭 लखनऊ 👉 गोमती
🍭 वाशिंगटन 👉 पोटोमेक नदी