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Sunday, 26 May 2019

अंडमान की जारवा जनजाति

जारवा जनजाति, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 6 आदिवासी जनजातियों में से एक है. इस जनजाति का सम्बन्ध “नेग्रिटो समुदाय” की जनजाति से है. वर्तमान में यह जनजाति मध्य अंडमान के पश्चिमी भाग और दक्षिण अंडमान के इलाके में रहती है.

यह जनजाति आज भी झुण्ड में रहकर शिकार करती और भोजन को इकठ्ठा करती है. जिस जगह पर जारवा जनजाति रहती है उसको 1979 में अधिसूचना के द्वारा ट्राइबल रिज़र्व एरिया घोषित किया गया था.

आइये इस जनजाति के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं;

1. अंडमान की "जारवा जनजाति" हिन्द महासागर के टापुओं पर पिछले 55,000 वर्षों से निवास कर रही है.

2. जारवा जनजाति के लोगों के मूल ओरिजिन अफ्रीका महाद्वीप माना जाता है.

3. "जारवा जनजाति" को विश्व की सबसे पुरानी जनजाति माना जाता है जो अभी भी पाषाण युग में जी रही है.

3. "जारवा जनजाति" अब विलुप्त होने की कगार पर है जिनकी संख्या अब लगभग 380 तक बची है.

अंडमान में जनजातियों की संख्या (जनगणना 2011 के अनुसार) इस प्रकार है;

जनजाति का नाम और जनसंख्या
अंडमानी, चरियार, चारी, कोरा, ताबो, बो, येरे, केदे, बी, बालावा, बोजिगीयाब, जुवाई, कोल -44
जारवा (Jarwa)-380
निकोबरीज-27168
ओंगस (Onges)-101
सेंटीनिलीज (Sentinelese)-15
शोमपेंस (Shom Pens)-229

4."जारवा जनजाति" के लोग आज भी धनुष बाण से शिकार करते हैं और इसी से मछलियों और केकड़ों का शिकार करते हैं.

5. जारवा जनजाति के लोग सूअर का मांस बहुत चाव से खाते हैं. वे समूह बनाकर सूअर का शिकार करते हैं.

6. अंडमान और निकोबार प्रशासन, ने 16.10.2017 की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इस जनजाति से सम्बंधित तस्वीरों और वीडियो को पोस्ट करना कानूनन अपराध है और इसका उल्लंघन करने पर व्यक्ति को 3 वर्ष की सजा भी हो सकती है.

7. SC & ST (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 2016 के सेक्शन 3(1) में यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति इस जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करता है, उनकी तस्वीरें खींचता है, उनकी नग्न अवस्था का वीडियो बनाता है तो उसको तीन साल की सजा और 10,000 रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा.

9. साल 1990 में "जारवा जनजाति" को स्थानीय सरकार ने घर बनाकर रहने की सुविधा दी लेकिन कुछ ही जारवा अपने क्षेत्र से बाहर आये.

10. जारवा जनजाति इलाके से केवल एक अंडमान ट्रंक रोड गुजरती है. जारवा इलाके में जाने के लिए लगातार एक साथ गाड़ियाँ बिना रुके गुजरती है और किसी भी गाड़ी को रुकने की इजाज़त नहीं है. "जारवा जनजाति" वाले इलाकों में पर्यटकों के रुकने पर पाबंदी है.

11. जारवा इलाके में जाते वक्त सेना की गाडियां भी आगे पीछे चलती है क्योंकि जारवा लोग कभी भी पर्यटकों पर अपने भालों, धनुष आदि से आक्रमण कर सकते है.

12. जारवा जनजाति से लोग आज भी बिना कपड़ों के ही रहते है लेकिन हाल ही के सालों में पर्यटकों के संपर्क में आने के कारण बहुत से जारवा अब कुछ कपडे पहने दिख जाते हैं.

13. जारवा जनजाति के लोगों को गाना गाने और नाचने का बहुत शौक है और एक सुर और ताल में ये नाचते गाते हैं और अपने परंपरागत वाद्य यंत्र बजाते हैं.

15. जारवा जनजाति के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा है इसके अलावा इनको जड़ी बूटियों का बहुत अच्छा ज्ञान है जिसके कारण ही वो बिना मेडिकल के ही इतने वर्षो से जंगलों में रह रहे है.

16. जारवा के लोगों का जब से बाहरी लोगो से सम्पर्क हुआ उनमें शराब और पान की लत पड़ गयी.

17. जारवा के जीवन में अनेकों लोगों ने डॉक्युमेंट्री बनाने की कोशिश है. कुछ साल पहले मीडिया में ऐसी ख़बरें आयीं थीं कि विदेशी पर्यटकों ने इन्हें कुछ खाना देने के बदले अपने मनोरंजन के लिए नचवाया था. हालाँकि सरकार ने इस पर कड़ा एक्शन लिए था.

18. इस समुदाय में परंपरा के अनुसार यदि बच्चे की माँ विधवा हो जाए या उसका पिता किसी दूसरे समुदाय का हो तो बच्चे को मार दिया जाता है.

19. बच्चे का रंग थोड़ा भी गोरा हो तो कोई भी उसके पिता को दूसरे समुदाय का मानकर उसकी हत्या कर देता है और समुदाय में इसके लिये कोई दंड नहीं है.

यह जनजाति अभी भी इतनी पुरानी दुनिया में रह रही है कि यदि आजकल के आधुनिक लोग इनसे मिलें तो अचंभित हुए बिना नहीं रह पाएंगे. ये लोग पूरी तरह से प्रकृति की गोद में रह रहे हैं. इन्हें नहीं पता कि टीवी, मोबाइल, हवाई जहाज क्या होता है और इसका क्या उपयोग हो सकता है.

सरकार ने इस जनजाति को बाकी दुनिया से सिर्फ इसलिए अलग कर रखा है कि इनकी संस्कृति ना बिगड़े, अर्थात ये आदिम काल में ही जियें. मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि सरकार जारवा जनजाति को एक संग्रहालय की वस्तु ना समझे और इन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने की कोशिश करे ताकि ये लोग भी जान सकें कि पृथ्वी पर रहने वाला आदमी अब मंगल गृह और चाँद पर बसने की योजना बना रहा है।

Thursday, 17 January 2019

RTI - RTI लिखने का तरीका


👉🏿RTI मलतब है सूचना का अधिकार - ये कानून हमारे देश में 2005 में लागू हुआ। जिसका उपयोग करके आप सरकार और किसी भी विभाग से सूचना मांग सकते है। आमतौर पर लोगो को इतना ही पता होता है। परंतु आज मैं आप को इस के बारे में कुछ और रोचक जानकारी देता हूँ -

👉🏿RTI से आप सरकार से कोई भी सवाल पूछकर सूचना ले सकते है।
👉🏿RTI से आप सरकार के किसी भी दस्तावेज़ की जांच कर सकते है।
👉🏿RTI  से आप दस्तावेज़ की प्रमाणित कापी ले सकते है।
👉🏿RTI से आप सरकारी कामकाज में इस्तेमाल सामग्री का नमूना ले सकते है।
👉🏿RTI से आप किसी भी कामकाज का निरीक्षण कर सकते हैं।
👉🏿RTI में कौन- कौन सी धारा हमारे काम की है।

👉🏿धारा 6 (1) - RTI का आवेदन लिखने का धारा है।
👉🏿धारा 6 (3) - अगर आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है। तो वह विभाग
इस को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5 दिन के अंदर भेज देगा।
👉🏿धारा 7(5) - इस धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को कोई आरटीआई शुल्क नही देना होता।
👉🏿धारा 7 (6) - इस धारा के अनुसार अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है
तो सूचना निशुल्क में दी जाएगी।
👉🏿धारा 18 - अगर कोई अधिकारी जवाब नही देता तो उसकी शिकायत सूचना अधिकारी को दी जाए।
👉🏿धारा 8 - इस के अनुसार वो सूचना RTI में नहीं दी जाएगी जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो।
👉🏿धारा 19 (1) - अगर आप
की RTI का जवाब 30 दिन में नहीं आता है। तो इस धारा के अनुसार आप प्रथम अपील अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते हो।
👉🏿धारा 19 (3) - अगर आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नही आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी
अपील अधिकारी को अपील कर सकते हो।

*👉🏿RTI कैसे लिखे?*

इसके लिए आप एक सादा पेपर लें और उसमे 1 इंच की कोने से जगह छोड़े और नीचे दिए गए प्रारूप में अपने RTI लिख लें
...................................
सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6(1) और 6(3) के अंतर्गत आवेदन।
सेवा में,
              (अधिकारी का पद)/
               जनसूचना अधिकारी
विभाग का नाम.............
विषय - RTI Act 2005 के अंतर्गत .................. से संबधित सूचनाऐं।
अपने सवाल यहाँ लिखें।

1-..............................
2-...............................
3-..............................
4-..............................

मैं आवेदन फीस के रूप में 10रू का पोस्टलऑर्डर ........ संख्या अलग से जमा कर रहा /रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्डधारी हूं। इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल.कार्ड नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से सम्बंधित
नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन सम्बंधित लोकसूचना अधिकारी को पांच दिनों के
समयावधि के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत
सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।
              भवदीय
        नाम:....................
        पता:.....................
       फोन नं:..................
      हस्ताक्षर...................
ये सब लिखने के बाद अपने हस्ताक्षर कर दें।
👉🏿अब मित्रो केंद्र से सूचना मांगने के लिए आप 10 रु देते है और एक पेपर की कॉपी मांगने के 2 रु देते है।
👉🏿हर राज्य का RTI शुल्क अगल अलग है जिस का पता आप कर सकते हैं।
👉🏿जनजागृति के लिए जनहित में शेयर करे।
👉🏿RTI का सदुपयोग करें और भ्रष्टाचारियों की सच्चाई / पोल दुनिया के सामने लाईए।

|| जय भारत ||

Sunday, 6 January 2019

डर लगता है

*आमाशय* को डर लगता है जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं।

*किडनी* को डर लगता है जब आप 24 घण्टों में 10 गिलास पानी भी नहीं पीते।

*गाल ब्लेडर* को डर लगता है जब आप 10 बजे रात तक भी सोते नहीं और सूर्योदय तक उठते नहीं हैं।

*छोटी आँत* को डर लगता है जब आप ठंडा और बासी भोजन खाते हैं।

*बड़ी आँतों* को डर लगता है जब आप तैलीय मसालेदार मांसाहारी भोजन करते हैं।

*फेफड़ों* को डर लगता है जब आप सिगरेट और बीड़ी के धुएं, गंदगी और प्रदूषित वातावरण में सांस लेते है।

*लीवर* को डर लगता है जब आप भारी तला भोजन, जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाते है।

*हृदय* को डर लगता है जब आप ज्यादा नमक और केलोस्ट्रोल वाला भोजन करते है।

*पैनक्रियाज* को डर लगता है जब आप स्वाद और फ्री के चक्कर में अधिक मीठा खाते हैं।

*आँखों* को डर लगता है जब आप अंधेरे में मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट में काम करते है।

और

*मस्तिष्क* को डर लगता है जब आप नकारात्मक चिन्तन करते हैं।

आप अपने तन के कलपुर्जों का पूरा- पूरा ख्याल रखें और इन्हें मत डरायें ।

ये सभी कलपुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। जो उपलब्ध हैं वे बहुत महँगे हैं और शायद आपके शरीर में एडजस्ट भी न हो सकें। इसलिए अपने शरीर के कलपुर्जों को स्वस्थ रखे।

*क्लींज़िंग करो और स्वस्थ रहो।*
*प्राकृतिक खाओ पियो-मस्त रहो।।*

Wednesday, 26 December 2018

आखिर अंतर रह ही गया

बचपन में जब हम रेल की सवारी  करते थे, माँ घर से खाना बनाकर ले जाती थी l पर रेल में कुछ लोगों को जब खाना खरीद कर खाते देखता बड़ा मन करता हम भी खरीद कर खाए l पापा ने समझाया ये हमारे  बस का नहीँ l अमीर लोग इस तरह  पैसे खर्च कर सकते हैं,  हम नहीँ l बड़े होकर देखा, जब हम खाना खरीद कर खा रहें हैं, वो लोग घर का भोजन ले जा रहे हैंl "स्वास्थ  सचेतन के लिए"।
आखिर वो अंतर रह ही गया l🙄

🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐

बचपन में जब हम सूती कपड़ा पहनते थे, तब वो लोग टेरीलीन पहनते थे l बड़ा  मन करता था पर  पापा कहते हम इतना खर्च  नहीँ कर सकते l बड़े होकर जब हम टेरीलीन पहने लगे तब वो लोग सूती  के कपड़े पहनने  लगे l सूती  कपड़े महंगे हो गए l हम अब उतने खर्च  नहीँ कर सकते l

आखिर अंतर रह ही गया 🙄🤔

⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖

बचपन में जब खेलते खेलते हमारी पतलून घुटनों के पास से फट जाता, माँ बड़ी ही कारीगरी से उसे रफू कर देती और हम खुश हो जाते l बस उठते बैठते अपने हाथों से घुटनों के पास का वो रफू हिस्सा ढक लेते l बड़े होकर देखा वो लोग घुटनों के पास फटे पतलून महंगे दामों  में बड़े दुकानों  से खरीदकर पहन रहे हैं l

आखिर अंतर रह ही गया🤔🙄

⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖

बचपन में हम साईकिल बड़ी मुश्किल से पाते,  तब वे स्कूटर पर जाते l जब हम स्कूटर खरीदे, वो कार की सवारी करने लगे और जबतक हम मारुति खरीदे, वो बीएमडब्लू पर जाते दिखे l
आखिर अंतर रह ही गया 🤔🙄

💰💰💰💰💰💰💰💰

और हम जब रिटायरमेन्ट का पैसा लगाकर  BMW खरीदे अंतर को मिटाने के लिए तो वो साईकिलिंग करते नज़र आये स्वास्थ्य के लिए।

   
अंतर रह ही गया🤔🙄
हर हाल में हर समय दो लोगो में अंतर रह ही जाता है , अंतर सतत है सनातन है सदा सर्वदा रहेगा , कभी भी दो व्यक्ति और दो परिस्थितिया  एक जैसी नहीं होती।  इसलिए जिस हाल में हो जैसे हो प्रसन्न रहे , कही ऐसा न हो कल की सोचते सोचते आज को ही खो दे और फिर कल इस आज को याद करे।

Wednesday, 3 October 2018

वो अवकाश चाहिए

मन की थकान जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए

इस भागती सी जिंदगी में
फुरसत की सांस चाहिए ।

चेहरों को नहीं दिल को भी
पढ़ने का वक्त हो ….

मोबाइल लैपटॉप से
कुछ पल
सन्यास चाहिए।

मन की जमीं के सूखे
पर तो
ध्यान ही नहीं।
कब बन गए उसर
हमें ये भान ही नहीं।

कोई फूल
इस पर
खिलने को
प्रयास चाहिए ।

अपनों की
देखभाल का
एहसास चाहिए ।

अब बहुत मन भर
गया
बड़प्पन
और मान से।

है बहुत तृप्त अहम
झूठी आन बान शान से।
इसको भी एक दिन का
उपवास चाहिए ।

बन जाऊं
तितली या परिंदा कोई
वो आभास चाहिए ।

मन की थकान
जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए..‼

Monday, 6 August 2018

*GST से एग्जाम में पूछे जाने वाले प्रश्न*

1-  GST  का पूरा नाम क्या है ?
*ANS - वस्तु और सेवा कर (GOOD AND SERVICES TAX )*

2- GST लागु करने वाला विश्व का पहला देश कौन सा  है
*ANS -फ्रांस 1954*

3-वह संविधान संसोधन जिसके तहत  GST पारित किया गया भारत में ?
*ANS -122*

4- GST परिषद में  कुल सम्मिलित सदस्यों की संख्या कितनी है?
*ANS -33*

5-GST  को भारत में पारित करने वाला पहला राज्य कौन सा है
*ANS - 1-असम -12 august 2016*

6- भारत का GST  किस देश के मॉडल पर आधरित है ?
*ANS-  कनाडा*

7- भारत में वस्तु और सेवा कर GST  कब लागु किया गया ?
*ANS - 1 जुलाई 2017*
पहले ये 1 अप्रैल 2017 को लागु होने वाला था।

8- भारत में GST  लागु करने का सुझाव किसने दिया ?
*ANS - विजय केलकर समिति ने*

9- सर्व प्रथम GST  बिल का  प्रारूप तैयार करने वाली समिति के अधक्ष्य कौन थे ?
*ANS - असीम दस गुप्ता*

10-  GST  बिल राज्य सभा  तथा लोक सभा में कब से पारित किया ?
*ANS 1-राज्य सभा  - 3 ऑगस्त 2016*
*2- लोक सभा  - 8 ऑगस्त 2016*

11-  GST  के लिए विधेयक के पक्ष में कितने वोट पड़े ?
*ANS –विधेयक के पक्ष में 336 और विपक्ष में 11*

12-  GST  बिल में राष्ट्पति ने कब मंजूरी दी ?
*ANS - 8 सितम्बर 2016*

13- GST  पंजीकरण में कुल कितने अंक है ?
*ANS – 15*

14- GST  की दरे कितने प्रकार की है ?
*ANS-  0%,5%,12%,18%,28%*

15-  लगभग कितने देशो ने GST  अपनाया है ?
*ANS - 160*

16-   भारत में GST का प्रस्ताव कब लाया गया था ?
*ANS -2000*

17- GST  परिषद का मुख्यालय कहा है
*ANS - दिल्ली*

18-   GST  परिषद के वर्तमान में अधक्ष्य कौन है ?
*ANS - अरुण जेटली*

19 – GST  बिल को सबस पहले पारित कहा किया गया ?
*ANS - तेलंगाना*

20- भारत का एक मात्र राज्य जँहा GST पारित नहीं किया है ?
*ANS- जम्मू कश्मीर*

21-   GST  दिवस कब मनाया जायेगा ?
*ANS – 1  जुलाई*

22- GST  की चोरी करने में कितने वर्ष का कारावास होगा ?
*ANS – 5*

23- GST  किस प्रकार का कर है
*ANS - अप्रत्यक्ष*

24- GST प्रशाशन के लिए किस नाम से पोर्टल तैयार किये गए है ?
*ANS - GST पोर्टल*

25- GST  नेटवर्क के साथ जुडी भारत की दो आईटी कम्पनी कौन सी है
*ANS- इनफ़ोसिस और विप्रो*

Thursday, 12 July 2018

दुध की मलाई

शिक्षा विभाग बन
बच्चों के लिए ढाबा

दुध दिया है सरकार नें
गर्म किया है अध्यापकों नें
और पीया है बच्चों नें
तो बताओ मलाई कोन खायेगा
यही तो उलझन है अभी तक
जो सुलझेगी नहीं
हर व्यक्ति सवाल कर रहा है
काश ये होता की
सरकार वहीं से दुध भेजती
और अपने अलग से आदमी भेजती
जो पिलाकर चले जाते
और मलाई जो बचती
वह सरकार को जमा करवा देते
यही तो विडम्बना है सरकारी महकमों की
कोई भी योजना लानें से पहले
कुछ भी विचार नहीं करती
अध्यापक क्या करेंगे बेचारे
दो पीरियड तो दुध में पुरे हो जायेंगे
एक दुध लानें में व दुसरा दुध पिलानें में
फिर पढ़ाई कहां से करवायेंगें
फिर आगे से आवाज आएगी
हमें रिजल्ट अच्छा चाहिये
क्या यही है हमारी शिक्षा प्रणाली
खाना तो चलता ही था
और दुध भी चालु हो गया
फिर और कोई सरकार आएगी तो
नाश्ता व चाय भी चालु करवाएगी
क्यों ना बच्चों की सोने की व्यवस्था भी
वहीं करा दी जाये
और अध्यापकों के खाने क़ि भी वहीं
सरकार को कुछ करना ही था तो
सरकारी यूनिफॉर्म बनवाते
और बच्चों को पहनाते
या स्कूल में और सुविधाएँ करवाते
दुध से क्या होगा
बच्चों का कोनसा विकास होगा
अभी तो शुरुआत है
अभी तो छिपकलियां गिरना बाकी है
कोकरोज गिरना बाक़ी है
फिर बच्चों का बीमार होना बाक़ी है
फिर जाँच समिति गठित कर दी जायेगी
सब विद्यालयों में हड़कम्प मच जायेगा
पुरा महकमा एक हो जायेगा
फिर दुध वालों की खैर नहीं और
अध्यापकों की खैर नहीं
क्या यही है अपनी शिक्षा प्रणाली
क्यों स्कूलों को बर्बाद करते हो
क्यों पढ़नें का समय छीनते हो
क्यों स्कूलों को ढाबे बनाते हो
क्या यही थी बी एड
और एस टी सी , की डिग्रियां
जो सबको रसोइये बनाकर रख दी
जो थी ज्ञान की पाठशाला
उसे क्यों पकवान शाळा बनाकर रख दी
जब नहीं आएगा दुध तो
मलाई कहां से आएगी
और मलाई नहीं आएगी तो
मलाई खानें का मौका कहां से आएगा
और जब ना होगा बांस
तो बांसुरी फिर कहां से बजेगी ,,,,,

*दुध   पिलाकर    सभी   बच्चों    का !*
*ध्यान   शिक्षा   से   क्यों हटाते   हो !!*
*जो  काम  था  सबके  घर  पर   होना !*
*वो   स्कूल   में   क्यों  करवाते   हो !!*
*जो समय  था पढ़नें और  पढानें  का !*
*उसे खानें पीनें में ही क्यों गंवाते हो !!*

क्या यही है हमारे सबसे बड़े लोकतन्त्र की शिक्षा प्रणाली,