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Monday, 19 October 2015

कोई भी लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।


अशोक भाई ने घर मेँ पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'

आवाज सुनते ही अशोक भाई की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर बाहर आयी और बोली

"अपनी beti का रिश्ता आया है,

अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है,
लडके का नाम युवराज है ।
बैँक मे काम करता है।
बस beti  हाँ कह दे तो सगाई कर देते है."

Beti उनकी एकमात्र लडकी थी..

घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था ।

कभी कभार अशोक भाई सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पत्नी और beti के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन
अशोक भाई मजाक मेँ निकाल देते ।

Beti खूब समझदार और संस्कारी थी ।

S.S.C पास करके टयुशन, सिलाई काम करके पिता की मदद करने की कोशिश करती ।

अब तो beti ग्रज्येएट हो गई थी और नोकरी भी करती थी
लेकिन अशोक भाई उसकी पगार मेँ से एक रुपया भी नही लेते थे...

और रोज कहते ‘बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य मेँ तेरे काम आयेगी ।'

दोनो घरो की सहमति से beti  और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया.

अब शादी के 15 दिन और बाकी थे.

अशोक भाई ने beti को पास मेँ बिठाया और कहा-

" बेटा तेरे ससुर से मेरी बात हुई...उन्होने कहा दहेज मेँ कुछ नही लेँगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई चीज ।

तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए है।

यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हूँ।.. तेरे भविष्य मेँ काम आयेगे, तू तेरे खाते मे जमा करवा देना.'

"OK PAPA" - beti ने छोटा सा जवाब देकर अपने रुम मेँ चली गई.

समय को जाते कहाँ देर लगती है ?

शुभ दिन बारात आंगन में आयी,

पंडितजी ने चंवरी मेँ विवाह विधि शुरु की।
फेरे फिरने का समय आया....

कोयल जैसे कुहुकी हो ऐसे बेटी दो शब्दो मेँ बोली

"रुको पडिण्त जी ।
मुझे आप सब की उपस्तिथि मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है,"

“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया, पढाया, लिखाया खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो चुका सकती नही...

लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैँ वापस देती हूँ।

इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिये हुए उधार वापस दे देना
और दूसरा चेक तीन लाख जो मेने अपनी पगार मेँ से बचत की है...

जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेगेँ,
मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे !

अगर मैँ आपका लडका होता तब भी इतना तो करता ना ? !!! "

वहाँ पर सभी की नजर beti  पर थी...

“पापा अब मैं आपसे जो दहेज मेँ मांगू वो दोगे ?"

अशोक भाई भारी आवाज मेँ -"हां बेटा", इतना ही बोल सके ।

"तो पापा मुझे वचन दो"
आज के बाद सिगरेट के हाथ नही लगाओगे....

तबांकु, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे।

सब की मोजुदगी मेँ दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हूँ ।."

लडकी का बाप मना कैसे करता ?

शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन

आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी थी।

मैँ दूर से उस बैटी को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था....

रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....

साक्षात लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं ??

लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ जरुर उठा,

“भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को is जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या" ???

Saturday, 17 October 2015

ऎसा भी प्रेम

     
एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया।

प्रेम भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में सुलाता।

कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते।

एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक गए।

भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे।

पेड़ पर एक ही फल लगा था।

बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा।

बादशाह ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा फकीर को दिया।

फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला, 'बहुत स्वादिष्ट ऎसा फल कभी नहीं खाया।

एक टुकड़ा और दे दें।

दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया।

फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग लिया।

इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए।

जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने कहा, 'यह सीमा से बाहर है।

आखिर मैं भी तो भूखा हूं।

मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं करते।'.

और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया।

मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था।

राजा बोला, 'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?'

उस फकीर का उत्तर था,

'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

सब टुकड़े इसलिए लेता गया ताकि आपको पता न चले।

Wednesday, 23 September 2015

एक दिन खुदा ने मुझसे कहा....

एक दिन खुदा ने मुझसे कहा....
"मत कर इंतजार इस जन्म में तेरा अकाँउटेट बनना
मुश्किल है"
मैंने भी कह दिया...
"लेने दे मजा इंतजार का, अगले जन्म में तो
मुमकिन है।"
.
फिर खुदा ने कहा...
"मत कर इतनी जिद, बहुत पछतायेगा।"
मुस्कुरा कर मेने कहा...
"देखते है तू कितना और तडपायेगा"
.
फिर खुदा ने मुझसे कहा...
"भूल जा इसे,चल तुझे IAS बनाता हूँ"
मैंने कहा...
"अकाँउटेट बन कर देख, तुझे ओर ज्यादा सम्मान
दिलाता हूँ"
.
गुस्से में खुदा ने कहा..
"मत भूल अपनी औकात, तू तो एक इन्सान है"
हंसकर मैंने कहा...
"तो बना दे मुझे अकाँउटेट और साबित करदे कि तू
भगवान है।"

चलो कुछ पुराने दोस्तों के

चलो कुछ पुराने दोस्तों के,
     दरवाज़े खटखटाते हैं;
देखते हैं उनके पँख थक चुके है,
     या अभी भी फड़फड़ाते हैं;
हँसते हैं खिलखिलाकर,
     या होंठ बंद कर मुस्कुराते हैं;
वो बता देतें हैं सारी आपबीती,
       या सिर्फ सक्सेस स्टोरी सुनाते हैं;
हमारा चेहरा देख वो,
       अपनेपन से मुस्कुराते हैं;
या घड़ी की और देखकर,
      हमें जाने का वक़्त बताते हैं ।
चलो कुछ पुराने दोस्तों के,
       दरवाज़े खटखटाते हैं..

Saturday, 19 September 2015

चाणक्य के १५ अमर वाक्य...

१ ) ➤ दूसरों की गलतियों से सीखो...
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी...।

२ ) ➤ किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए...
सीधे वृक्ष और व्यक्ति ही पहले काटे जाते हैं...।

३ ) ➤ अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए...
वैसे दंश भले ही न दो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए...।

४ ) ➤ हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है...
यह कड़वा सच है...।

५ ) ➤ कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो...
मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ...?
इसका क्या परिणाम होगा...?
क्या मैं सफल रहूँगा...?

६ ) ➤ भय को नजदीक न आने दो...
अगर यह नजदीक आये इस पर हमला कर दो...

यानी भय से भागो मत इसका सामना करो...
७ ) ➤ दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है...

८ ) ➤ काम का निष्पादन करो...
परिणाम से मत डरो...

९ ) ➤ सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है...
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है...

१० ) ➤ ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है...
अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ...

११ ) ➤ व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं...

१२ ) ➤ ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ...
वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे...
समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं...

१३ ) ➤ अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो...
छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो...
सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो...
आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है...

१४ ) ➤ अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है...

१५ ) ➤ शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर है।

लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे...

मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे...

चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे...

सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए...

छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं...

आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे...

दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था...

कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे...

इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था...

रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे...

पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था...

मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे...

अब शायद कुछ पा लिया है,
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया...

जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?

हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी,
आम हो जाती है।

एक सवेरा था,
जब हँस कर उठते थे हम...

और

आज कई बार,
बिना मुस्कुराये ही
शाम हो जाती है!!

कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते...

खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते...

--हरिवंशराय बच्चन
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

चुटकुला तो नही है पर यह पढने के बाद एक प्यारी सी स्माइल जरूर आएगी.....

1) कितना मुश्किल है, जिंदगी का सफर..., भगवान मरने नही देते और इंसान जीने नही देते।

2) खून जिसका भी हो रंग सबका एक ही है, कैसे पता लगाया जाये बेगाना कौन है और अपना कौन है।

3) चलो माना दुनियाँ बहुत बुरी है, लेकिन तुम तो अच्छे बनो तुम्हे किसने रोका है....!!

4) जो जैसा है, उसे वैसा ही अपना लो…!! रिश्ते निभाने आसान हो जायेंगे..,

5) “दुआ” कभी खाली नही जाती… बस लोग ईन्तजार नही करते..!!

6 ) हे स्वार्थ तेरा शुक्रिया... एक तू ही है , जिसने लोगो को आपस में जोड़ कर रख रखा है.

7) वक़्त की मार तो देख... दुनिया जीतने वाले सिकंदर का देश ... दिवालिया हो गया....

8) ''' गिरना भी अच्छा है,औकात का पता चलता है ,, ''' बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, अपनों का पता चलता है ,,

9) बहुत देखा जीवन में समझदार बन कर, पर ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर ही मिलती है...!!!

10) गलती जिंदगी का एक पन्ना है; परन्तु 'रिश्ते' पूरी किताब हैं। ज़रूरत पड़ने पर 'गलती' का पन्ना फाड़ देना लेकिन एक पन्ने के लिए पूरी किताब मत फाड़ देना

11) जिन्दगी के सफर से, बस इतना ही सबक सीखा है । सहारा कोई कोई ही देता है, धक्का देने को हर शख्स तैयार बैठा है...!!

12) इंसान को उस जगह हमेशा 'खामोश' रहना चाहिये - जहां . . . 'दो कौड़ी' के लोग अपनी 'हैसियत' के गुण गाते हों.....

13) धर्म से कर्म इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म करके भगवान से मांगना पडता है, जब कि कर्म करने से भगवान को खुद ही देना पडता है॥

14) कोई भी ईन्सान इतना अमीर नही होता की वो अपना भुतकाल खरीद सके ... और... कोई इतना गरीब नही होता की वो अपना भविष्यन बदल सके.

15) इंसान को अपनी औकात भूलने की बीमारी है और कुदरत के पास उसे याद दिलाने की अचूक दवा...

16) छोटे छोटे कदम मीलों का सफर तय कर सकते हैं।

17) ‘सब्र’ और ‘सच्चाई’ एक ऐसी सवारी है…..जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती….. ना किसी के कदमो में…और ना किसीकी नज़रों में..!!

18) अच्छे के साथ अच्छे रहे...लेकिन बुरे के साथ बुरे नहीं बने... "क्योंकि" पानी से खून साफ कर सकते है लेकिन खून से खून नही....